तेरी अदा | Teri Ada – Your Style

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तेरी अदा

Bachia Ke Tau brings the never ending expectations from the loved ones through his poem titled तेरी अदा | Teri Ada – Your Style

Do I belive you or myself?

Why it is that people hold on to one little grudge against numerous favours and we still care more about their opinions than our own beliefs. Do you share the same paradox with Tau ji.

करुं क्या बयां मैं तेरी अदा
तेरी हर अदा ने दगा किया
कबि मौत से तो डरे न तुम
हमें ज़िंदगी से डरा दिया
तेरी शौक और तेरी अज़मदे
मेरी ज़िंदगी से हैं खेलते
कभी रो के हमको बुला लिया
कभी हंस के हमको भुला दिया
वही मंजिले वाही मयकदे
वाही आशमां पर कहां है तू
या तो मुझको नशा ही हुआ गहर
या कि तूने मकां ही बदल दिया
कभी मेरी गली से भी तो गुजर
कभी आ के देख मेरी खबर
कि अभी तलक भी बुझा नहीं
जो चिराग तूने जला दिया

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नियति

वो हंस के कह गये,
हम हंस के सह गये,
कब के रुके समंदर
एक पल मे बह गये..

समझा उन्हें खुदा तो,
वो खुदा ही हो गये,
हम मदिरों की हद पे
फकिरो से रह गये.

अब ये सिलसिला ख़तम हो
ख़त्म हो गिलों की गिनती
रहे फक्र कि हम भी अपने
जुनूनो मे पॅट गये.
कब के रुके समंदर
एक पल मे बह गये..

 

 

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