जिन्दगी | Zindgi – Life

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जिन्दगी

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New day new challenge.

If there is birth, there is death but there is something very important between the two and that is Life. How much control do we have on our life?  How much we can discover in our life. See what is more important for Mrs Khallas – Goal or Journey.

खिल कर मुरझाने का नाम है जिन्दगी
ज़माने के लिये फनां हो जाने का नाम है जिन्दगी

इस जहां के गहन अंधेरों में
खुद को जलाने का नाम है जिन्दगी

इस बहते हुए गम के दरिया में
अश्कों को पी जाने का नाम है जिन्दगी

जमाने की इस झूठी हंसी के साथ
दिल को तबाह कर मुस्कराने का नाम है जिन्दगी

गम के साज पर छेड़ जिन्दगी के नगमें
आहों के स्वर में गुनगुनाने का नाम है जिन्दगी

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जीस्त के दामन में मिली
रंगों को पनाह
तमाम खुशबुओं से महका रहा जहां
नींद फिर रात भर क्यों नहीं आती

जाने पहचाने रास्तों का था ये सफर
हर मोड़ से मुड़ कर भी पहुंचे थे मंजिल पर
नींद फिर रात भर क्यों नहीं आती

ख्वाबों और ख्वाहिशों की उम्र दराज रही
दिलों से होकर जिन्दगी की राह रही
नींद फिर रात भर क्यों नहीं आती

क्यूं है किसी अंत का इंतजार सा हमें
मौत का तो एक दिन तय है
नींद फिर रात भर क्यों नहीं आती

नींद फिर रात भर क्यों नहीं आती

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रोज सवेरे मन के आंगन को चमकाती
एक धूप सी फ़ैल जाती है
फिर धीरे धीरे जिन्दगी की आलस दोपहर
सी वहीं जम जाती है
शाम होने तक वो ठंडी सी धूप
कल आने के लिये फिर चली जाती है
यूं ही सुबह दोपहर शाम फिर सुबह में
सारी उम्र बीत जाती है

 

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Poetry , Mrs Khallasबेइमानी यादेंरिश्तेदर्दमाँ,  सलाह,  ईश्वर,  जिन्दगी,  उलझन 

 

 

 

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1 thought on “जिन्दगी | Zindgi – Life

  1. i liked each word and line of all the poems of Mrs Khallas…. keep posting….

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