कविता | Kavita – Life time dream

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एक कविता का प्रयास

Long Poetry by Mr Khallas to fulfill his life time dream hence -   कविता | Kavita – Life time dream

For some, learning never ends.

Never give up on your dreams. Some dreams may require more than one life time.Enjoy the result of a desperate effort by Mr Khallas to create a sensible poetry. A life time dream remains a distant dream.

चंद शब्दों को समेटकर देखा
व्याकरड़ की दहलीज़ से निकलकर देखा
पिछले कुछ पन्ने पलटकर देखा
गानों को सपाट गाकर देखा
उनसे परामर्श भी करके देखा

Long Poetry by Mr Khallas to fulfill his life time dream but Even the hard work resulted in vain

For some, hard work pays dividend.

दीर्घशंका में अंतरध्यान बैठ कर देखा
Pen और paper बदलकर देखा
चाय के चार कप सटक कर देखा
Internet पर surf करके देखा
बारिश में भीगकर देखा
प्रकृति के विभिन्न रूपों से गुजरकर देखा
थक हारकर औंधे गिरकर देखा
पुनः घटनाक्रम को उचित क्रम में सजोकर देखा
दिन को छोटा कर के भी देखा
तख्खलुस पर तख्खलुस बदल कर देखा
पसीने की जगह ढाई सौ ग्राम तेल निकालकर देखा
बेघर बालकों की गली से निकलकर देखा
निराला की पत्थर तोड़ती श्रमिका को देखा
समय के प्रवाह में बहकर देखा
महफिल में सुरा की इन्तहा कर के देखा

Even extreme yoga did not help Mr Khalls in creating a long poetry hence fulfilling his life time dream

For some, Yoga opens up mysteries.

ऐन मौके तक भाव भंगिमा रोक के देखा
हंसना तो दूर मुस्कराना भी छोड़ कर देखा
शहर से दूर एक मशहूर शिला पर मत्था टेककर देखा
नितान्त शांत और महफूज़ जगह पर रात बिता कर देखा
अल्लाह और राम में भेद मिटाकर देखा
नत्थू मोची को गले लगाकर देखा
घर के हर कमरे का नक्शा बदल कर देखा
different colour के bulbs बदलकर देखा
दूर से आती लोकगीत की तानों पर कान लगाकर देखा
extreme तो देखिये कि – पिताश्री की आज्ञा का पालन कर के देखा
local और overseas कलाकारों की महफिल में जाकर देखा
अपना nature बदल दोस्तों की बातें सुनकर देखा
भरोसेमंद लोगों को upset कर के देखा
अपनी ही car से पचास किलोमीटर दूर बसे दोस्त के घर जाकर देखा
दोनों संतानों को सौ dollars each देकर देखा
cartoon network की जगह CNN लगाकर देखा

Mr Khallas is struggling to find balance among his hobbies in search of creativity is fun - painting, writing, music,  cooking, karate and so on

For some, life is all about balancing.

Karate का काता reverse order में करके देखा
Treadmill पर भी उलटे चलकर देखा
तीन साल पहले लिखे computer programme को decode करके देखा
driver की जगह pillion बनकर देखा
कभी दाड़ी बढ़ाकर तो कभी मूंछ मुढ़ाकर देखा
दिन में तीन बार नेथी की क्रिया करके देखा
बचपन की गलतियों को दोहराकर देखा
हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का अभ्यास करके देखा
अखण्ड रामायण का पाठ करके भी देखा
peak period में international travel करके देखा
कभी Singapore तो कभी Tiger Airlines से चलकर देखा
भिन्डी की सब्जी में पानी डालकर देखा
Noodles को Pressure Cooker में उबालकर देखा

Mr Khallas just can not have a bug free mind to get the right flow for his long poetry to fulfill his life time dream

For some, life is all about finding bugs.

सुदूर रिश्तेदार की शादी में Ice-cream के पकौड़े खाकर देखा
मंगल गृह पर Challenger की landing का live telecast भी देखा
महाभारत और रामायण का सीरियल कई बार देखा
Hollywood और Bollywood का समन्वय कर देखा
YouTube का गहन अध्यन कर के देखा
चंद उम्दा sites का registration fill करके देखा
Creative writing का छः मास का course करके देखा
Breakfast की जगह Lunch खाकर देखा
सरहद पर बैठे जवान की माँ से मिलकर देखा
होश और बेहोशी की चरमसीमा तक जाकर देखा
याद रह गये सपनों पर गौर करके देखा

Mr Khallas gets lost among myths and facts. Nothing is helping him to create a great poetry and fulfill his life time dream

For some, Walking through under the camel cures baldness!!

उनके कहने पर ऊंट के नीचे से निकलकर देखा
वैष्ड़ों देवी से कामख्या देवी तक यात्रा करके देखा
रात की बची रोटी का पराठा बनाकर देखा
diabetic होते हुए भी जलेबी और समौसे खाकर देखा
Hospital और Olympic में voluntary work करके देखा
न चाहते हुए भी महीने भर vegetarian रह कर देखा
पत्नी की आज्ञा की अवहेलना करके देखा
एक रोज तो हर रहगुजर को मुस्कराकर hello करके देखा
दही को लटकाकर श्रीखंड बनाकर देखा
ज्ञानी और अज्ञानी के संवाद में सम्लित होकर देखा
उनकी तिरछी नजरों से बचकर भी देखा

Even healthy eating and lifestyle is not a source for a great poetry for Mr Khallas

For some, milk is complete food.

बच्चों की नानी को पूरे साल Melbourne बुलाकर देखा
नाना की आध्यात्मिक चर्चाओं का खुलासा करके देखा
family के कई नये पुराने photographs निकालकर देखा
नई बिहाई बछिआ वाले ढूध की मिठाई खाकर देखा
संगीत में सुर और लय में ताल मिलाकर देखा
GI कि तालिका में 100 से 0 तक जाकर देखा
ढ़ाई हफ्ता बिना नहाए रहकर देखा
Sector J से Sector L में shift होकर देखा
साली और सलहजों के साथ पूरी तल कर देखा
सालों के साथ सुट्टा लगाकर भी देखा
Fish oil, Multi Vitamin और Minerals का सेवन बढ़ाकर देखा

Singing has purified the heart of Mr Khallas but that is also not enough to bring out creativity in form of कविता | Kavita – Life time dream

For some, singing is divine.

मराठी बाउ के साथ चावल में दूध व नमक डालकर देखा
चाय में चीनी व नमक साथ डालकर देखा
बिना भिगोये काबिली चने उबालकर देखा
juice निकली गाजरों का हलवा बनाकर देखा
International Call पर उनसे पूछकर पोहा बनाकर देखा
परिवार जनों में फूट डालकर भी देखा
फिर कुछ जानलेवा दुश्मनों में सुलह कराकर देखा
लोई को स्थिर व् स्वतः को परिक्रमित कर
इकाई नहीं दहाई में रोटी बेलकर देखा
पचास की उम्र में कक्छा पांच की books का अध्यन करके देखा
साथ ही management की top 50 books का अध्यन भी करके देखा
teenager की तरह coffee shop में घंटों बैठकर देखा
Malaysian और Thai Restaurants की विभ्भिन dishes में डूबकर देखा
किन्तु अभी तक कविता का स्थाई बनते भी न दिखा

Can Mr Khallas create a great poem or कविता | Kavita and achieve his Life time dream in this life?

For some, journey does not end here.

अंततः हर प्रयास से असफल और
ज़िंदगी से बेदखल हो
उस रात अनायास
सफेद चादर को सर से हटाकर
थोड़ा सा मुस्करा कर
कविता ने धीरे से कहा
अरे ये ही तो है खल्लास !!

 

 

Poetries by Mr Khallas and his family and friends enforcing creativity is fun - thumbnail Mr khallas urf Atulanand urf Atul Johari the creator of The Khallas Way propogating creativity is fun - Thumbnail Sarcasm by Mr Khallas by twisting Sher-o-Shayari and calling it शेर Vs शमशेर | Lion Vs Lame - Thumbnail Sarcasm by Mr Khallas in the form of Sher-o-Shayari on Motivation - Thumbnail Sarcasm by Mr Khallas in the form of Sher-o-Shayari on इश्क |Ishk – Love - Thumbnail Sarcasm by Mr Khallas in the form of Sher-o-Shayari on नोंक झोंक |Nok Jhok – Argument - Thumbnail Sarcasm by Mr Khallas in the form of Sher-o-Shayari on वार्तालाप | Vartalap – Discussion - Thumbnail  Sher-o-Shayar by Mr Khallas on serious issues unlike his character hence यूँ ही | Yun Hi – Why - Thumbnail Poetry by Mr Khallas on a very serious note unlike his usual writing style hence ये क्या | Ye Kya – What - Thumbnail Long Poetry by Mr Khallas to fullfil his life time dream hence -   कविता | Kavita – Life time dream - Thumbnail

 

Poetryखल्लास,  शेर Vs शमशेरखल्लास और Motivation,  खल्लास और इश्क,  Mr & Mrs खल्लास – नोंक झोंक,  वार्तालाप,  खल्लास – यूँ ही,  खल्लास – ये क्या,  एक कविता का प्रयास

 

 

 

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यूँ ही | Yun Hi – Why

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 Sher-o-Shayari by Mr Khallas on serious issues unlike his character hence यूँ ही | Yun Hi – Why

Honesty is just skin deep!

Why! between humour and emotion there lies a vast plane of confusion. Why appearance is deceptive. Why we can not trust things at their face value. Mr Khallas wonders if he needs sixth sense to understand the world.  Enjoy reading from confused Khallas.

आओ सुनाए तुमको आज और अन्दाज में
कहीं वो आजमाने न लगें हमको अपने ही अन्दाज में

शराफत तो बस skin deep है
अन्यथा तो बस गुनाह ही गुनाह है

फुसफुसा कर कान में कुछ यूँ कहा उसने
खल्लास समझ बैठे कुछ महत्वपूर्ण कहा उसने

वो एक के पीछे zero लगाते गये
खल्लास उधर खड़े मुस्कराते रहे

वो सुरक्षा चक्र बढ़ाते गए
खल्लास दुआ में हाथ उठाते गए

वो कृत्रिम प्रक्रियाओं की प्राथमिकता समझाते गए
खल्लास प्रकृति के नियम दोहराते रहे

In his Sher-o-Shayari Mr Khallas expresses his scepticism when someone shares a secret

Do not share this secret with anyone else!

खल्लास जिधर मुड़ जाओ रास्ते खुल जाते हैं
चलते चले जाओ रास्ते फिर मिल जाते हैं

शिकवे शिकायत से क्या लेना देना
चलो आज बिन बहाने कुछ समय गुजारें

अब दिन और रात में भेद कहां
समय का तकाज़ा है
खल्लास बचा ही क्या जो गंवाना है

चंद कदम चले ही थे कि पग डगमगाने लगे
दो जाम पिए भी न थे कि होश में आने लगे

चले जब बन ठन के तो ये भूल गये
चलना संभल संभल के जो सुनते आये थे बचपन से

यादें तो होती है भूल जाने के लिये
चंद खूबियां काफी हैं दुनियादारी निभाने के लिये

In his Sher-o-Shayari Mr Khallas wonders why war gets precedence over peace

Do they need war or opportunities?

हमको सिखाते रहे जीने कि कला जो मर मर के
हम साथ भी निभा न सके उनसे दो पल के लिये

रुके ऐसे कि चलना भी भूल गये
मंजिल तो मंजिल रास्ता भी भूल गये

रूह ज़िस्म में न नशा जाम में
हर रोज होता है जब सूरज आसमान में

चलने दो दौर जाम के रुकने न दो
मंजिल तो बहाना है, दूर हमको जाना है

बंजर हो जाये जमीं तो कर लेना याद जरा
क्यूँ कभी गुलिस्ता सजा करते थे यहाँ

जमीं जब सूरज को निगलने लगे
लौट चलो, कहते हैं शाम होने लगी

चंद कदमों की थी ये ज़िन्दगी
फिर बेइन्तहा लफ़्ज़ों में क्यूँ उलझ गयी ये ज़िन्दगी

क़तरा क़तरा ज़िस्म से जान जब निकलने लगे
मुस्करा लो, यही तो निशां है, मंजिल अब आसां है

 

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वार्तालाप | Vartalap – Discussion

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वार्तालाप

Sarcasm by Mr Khallas in his poetry in the format of Discussion | वार्तालाप - Vartalap

I win. No I win.

Chatting is not limited to human being; enjoy the discussion between a Vulture & Pharmacist, a Crab & Politician, a Mouse & Scientist and many more

शुद्ध बिंदु ने चँद्र बिंदु से कहा
देखें कौन पहले blink करता है

मंद-ए-बुद्धि ने तीव्र-ए-बुद्धि से कहा
यार क्या बेवकूफी कि बात करता है

चंद-ए-लफ्जों में बंध-ए-मजदूर (पति महोदय) ने कहा
कितना सुख है बंधन में

Mr Khallas in his Shayari ridicules the strength of an elephant compared to an ant

I can lift ten times of my weight!!

चींटीं ने हाथी से कहा
अपने से दस गुना weight उठाकर दिखा

Jelly fish ने Cobra सांप से कहा
मुझे डंक मारकर दिखा
वरना आ गले लग जा

मच्छर ने हठ योगी से कहा
पानी पर चलकर दिखा

Flamingos ने निमंत्रण पत्र पर लिखा
आप सादर सपरिवार आमंत्रित हैं

गिद्ध ने pharmacist से पूछा
इस antacid के कोई side effects तो नहीं हैं

Marsupials ने सर्वसमत्ति से कहा
Australia has least pick pocketers

Mr Khallas makes mockery through his Shayari about the environmental damage that is causing extinction of vultures

I can digest anything, but …..

Turtle ने Real Estate Agent से पूछा
Open for Inspection का मतलब क्या है

Crab ने Politician से कहा
मुझे चलना सीखने के लिए धन्यवाद

चूहे ने वैज्ञानिक से कहा
मानवता के लिए तू भी कुछ त्याग कर के दिखा

काकरोज ने डायनासोर से कहा
राजा और प्रजा का रहस्य समझा

Mr Khallas appreciates the sacrifice on small animals in the name of science in his poetry titled वार्तालाप | Vartalap – Discussion

I have done more than anyone for humanity!

बिल्ली ने कुत्ते से कहा
pet या pest, किसमें है मजा

 

 

 

 

 

 

 

 

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नोंक झोंक |Nok Jhok – Argument

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नोंक झोंक

Sarcasm by Mr Khallas in the form of Sher-o-Shayari on नोंक झोंक |Nok Jhok – Argument

But you have not moved a bit!!

Enjoy two people from diametrically opposite background locked together in an argument.

हम तो चलते चलते थक गये
वो बोले displacement zero है

हम तो पसीने पसीने हो गये
वो बोले work done zero है

हम विज्ञान से और वे कला से स्नातक हैं
तभी तो हम सूत्र और वे सूत्रधारक हैं

ज्ञानी ने विज्ञानी से कहाभविश्य के लिए भूत के पीछे क्यूँ पड़े हो

ज्ञानी ने विज्ञानी से कहा
अर्थ की आड़ में अनर्थ क्यूँ करते हो

A scientist and saint is locked in an argument | नोंक झोंक about the real meaning of progress in this poetry/shayari by Mr Khallas

Finally! Formula of success!!

विज्ञान कि खोज में हम जितना deep जाते गये
ज्ञान से खल्लास जिन्दगी को दूर पाते गये

**********

लगता है होने लगा भरोसा अब उनपर
न चलता है अब कोई जोर जो उनपर

शाम थी, तन्हाई थी
बड़ी मेहनत कि कमाई थी

बैठ जाते हैं वो, जो सज संवर कर; सबेरे से
थक के गिर जाते हैं खल्लास घर और बाहर के थपेड़ों से

चश्मे दीद हुए वो जब, बड़े बदनसीब हुए हम तबमहफिले जाना हो रहे थे, तुरत रवाना हुए हम तब

बड़े खुलूस से फ़िज़ूल करारते हैं वो
फिर प्यार से बुला के आरती उतारते हैं वो

Mrs Khallas sending away Mr Khallas from her grave as he could never appreciate her during her life time and kept arguing with her

Time to realise – Get on with your life now.

शाम आये तो पूरी आये
नहीं तो शामते शाम ही क्यों आये

एक खुलासा हुआ एक खुलासा किया
एक खुलासा हुआ एक खुलासा किया
एक खुलासा हुआ एक खुलासा किया
एक दुबारा हुआ एक तिबारा किया

दस्तक दी क़फ़स पर जो उनके तो ये आवाज आयी
जियो खल्लास जियो, अब यूँ ही घिस घिस के

 

 

 

 

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इश्क |Ishk – Love

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इश्क

Finding love may be hard but for Mr Khallas even understanding of love is a big challenge.

Sarcasm by Mr Khallas in the form of Sher-o-Shayari on Love or Ishk  -  MR Khallas can not look beyond physical attraction

Love-Like-Hate-Adore

जवां हम भी थे जवां वो भी
हौसले बुलन्द थे फिर फासले को क्या गम थे

सुरूर था, गुरुर था, फितूर भी था
बचपन था, जवानी थी, फिर अपने को आजमाना भी तो था

खूने खंजर से करें या तीरे निगाहों से
कत्ल तो फिर कत्ल ही होता है

चश्मे तर से न सही बदनसीब के लिये
मुस्करा कर दिल तो रुसवा न कीजये

सब्र का इम्तिहां जब ले चुके वो
नामर्द हो कह तन्हा छोड़ चले वो

सितम करना उनका गुनाह न था कभी खल्लास
सितम न सहना हमारा पर हुआ नगवारां उनको

Mr Khallas falls in love with an attractive girl but is scared with the cost associated in his Shayari

But how much she will cost me?

गैर-ए-यकीं से डिगा न एतबार कभी
करके भरोसा मगर अपने पर पछताए बहुत

ऐ दिल मुझे बता दे तू किस पे आ गया है
काफिर सिला तो दे इस मौजे दिल का बिल क्या होगा

ख़ल्लास मुहब्बत सा सितम् न कर
बेवफा नहीं जो यूँ ही छोड़ जायेगी
गर बेवफा ही सही तो यूँ भी न रुक पायेगी

मुद्दतों के बाद वो रूबरू हुए
न हमसे तब कुछ हुए
न हमसे अब कुछ हुए


 

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Motivation

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Motivation

Most people find appreciation as motivation factor but Mr Khallas has to be content with criticism only.

खल्लास ! ज़ुबानें उर्दू से न घबरा
डरते नहीं वीर गिरने से जंगे मैदां में

मैंने डाल दी है शेर में शमशेर कि आत्मा
तुम भी हृदय से मिटा दो करुणा की भावना

कांपते हैं खुश्क पत्तों से लव उनके
खल्लास निकल पड़े संग शमशेरों के

हर शेर पर जो पीट लेते हैं सर जो मेरे भाई
हम समझ लेते हैं हो रही है हमारी हौसला आफ़जाई

कहीं गैरों से न छिड़ जाये जंग शेरों में
हमने सर छिपा लिया है चंद शमशेरों में

 

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ये क्या | Ye Kya – What

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ये क्या – What

Poetry by Mr Khallas on a very serious note unlike his usual writing style hence ये क्या | Ye Kya – What

You might have control on our birth and death but not on our destiny!

What caused Khallas to create some serious poems?

रोना तो हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है
मुस्कराना तो फिर भी एक कला है ।

एक तिहाई जमीं और दो तिहाई सागर है
जमीं शांत और सागर का कोलाहल है ।

नदियां जरूर कल कल करती हैं
जब तक धरती पर रहती हैं ।

पवन तो कलरव करता है शाखों से मिलकर
मंद मंद कभी तो कभी बेहिसाब हंसता है ।

भले ही आदि और अंत पर तेरा डेरा है
जीवन पर डालना मुस्कराहट का डेरा है ॥

 

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शेर Vs शमशेर | Lion Vs Lame

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शेर Vs शमशेर

I seriously lacked creativity and hence envied Sher-o-Shayari which resulted into twisting of Sher and calling it Shamsher.  Here are some examples. Of course I paid the cost of it and advise you to do it on your own risk. On left side are the original Sher while on the right side is the result of my twisted mentality.

दिल की हालत की तरफ किसकी नज़र जाती है
इश्क़ की उम्र तमन्ना में गुज़र जाती है

दिल की हालत की तरफ किसकी नज़र जाती है
ज़िस्म की तम्मना में उम्र गुजर जाती है

हममें ये बुराई है कि दिल में नहीं रखते
लोगों में ये खूबी है कि मुँह पर नहीं कहते

लोगों में ये खूबी है कि मुँह पर नहीं कहते
हममें ये बुराई है कि दिल में नहीं रखते

मुहब्बत का अन्जाम मुहब्बत वालों से पूछिये
कितनी बार दम निकला दम वालों से पूछिये

क़त्ल-ए-आम का उल्लास कातिलों से पूछिए
महफ़िल में मरने वालों का हाल-ओ-चाल तो पूछिए

हम खुदा के कभी कायल ही न थे
उनको देखा तो खुदा याद आया

हम खुदा के कभी कायल ही न थे
उनको देखा तो कूवते लाहौल विला आया

हया से सर झुका लेना, अदा से मुस्करा देना
हसीनों को भी कितना आसान है बिजली गिरा देना

हाथ से सर खुजा लेना फिर अट्टाहस लगा देना
हम मर्दों को भी आता है वक्त गवां देना

आशिक मरते नहीं दफनाए जाते हैं
कब्र खोद कर देखो इंतजार करते मिलेंगे

इश्क मरता नहीं छुपाया जाता है
दिल टटोल कर देखो घाव खुल जाया करता है

आये थे हंसते खेलते मयखाने में फ़िराक
जब पी चुके तो सजीदा हो गये

आये सब हंसते खेलते महफ़िल में बेहिसाब
जब पी चुके अथाह तो बेवफा हो गये

हर कहर बुरी होती है हर उम्र बुरी होती है
हुस्न कहां तक रहे बचकर यारों कि हर नज़र बुरी होती है

न इनकी कही बुरी होती है न उनकी कही बुरी होती है
कहाँ तक मौन रहें, अपनी तो हर बात खंजर होती है

 

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