रिश्ते | Rishte – Relationship

Share

रिश्ते

hindi-poetry-on-relationship-by-mrs-khallas-planets-have-life-time-bonding

Relationship – Ever changing still together

Are we what we are or how we are related to each other? We may like to live for ourself but we would rather die for relationship.   Mrs Khallas has spent most of her ink in defining ever evolving nature of relationship among human beings and beyond.

रिश्ते केवल एक शब्द
या इसका भी है कोई अर्थ
जन्म के साथ जुड़ जाते हैं
उम्र के साथ बढ़ जाते हैं

कभी डगमगाते हुए
कभी संभलते हुए
हर उम्र के अलग रिश्ते
या हर रिश्ते की एक निर्धारित उम्र

कुछ सुलझे एक दायरे में कैद
कुछ उलझे से पर हर कैद से आजाद
कुछ जीवन मिथ्या से रिश्ते
कुछ मौत से सच्चे रिश्ते

Hindi poetry on relationship by Mrs Khallas - confused with complexities of relationship

What is so confusing about relationship?

कभी प्यार से प्यारे
कभी घृणा से घृणित रिश्ते
कभी सपने से रेशमी
कभी हकीकत से कटीले रिश्ते

कुछ मृग तृष्णा से लगते
तो कुछ रग रग में समाये रिश्ते
कभी पलकों के ऊपर बोझ बने
तो कभी होठों पर मुस्कराते रिश्ते

मन को बहलाने को ये बदलते रिश्ते
या शब्दों की भीड़ में
केवल एक शब्द से रिश्ते

********************

Hindi poetry on relationship by Mrs Khallas - attraction of moon reminds my love

Who is obsessed with whom?

पता नहीं किसकी जुस्तजू में
गिरा जा रहा था चाँद
शायद जमीं के प्यार पर
निसार हो रहा था चाँद
कुछ पीला सा कुछ कटा सा
कहीं होश खो रहा था चाँद
हाथों की लकीरों को
जब मिल कर देखा
तो कुछ और पास लगा चाँद
कभी चाँद छूने की बेकार सी ललक थी
आज खुद ही फिसलता आ रहा चाँद

 

 

Poetries-by-Mr-Khallas-and-his-family-and-friends-enforcing-creativity-is-fun-thumbnail poems-by-Mrs-Khallas-thumbnail  Hindi-poetry-on-dishonesty-by-mrs-khallas-thumbnail Hindi-poetry-on-memories-by-Mrs-Khallas-thumbnail hindi-poetry-on-relationship-by-mrs-khallas-thumbnail hindi-poem-on-Pain-by-mrs-khallas-Thumbnail hindi-poem-on-ma-or-mother-by-mrs-khallas-Thumbnail Hindi-poems-on-advice-by-mrs-khallas-Thumbnail Hindi-poems-on-god-or-Khuda-by-mrs-khallas-thumbnail hindi-poems-on-life-or-zindgi-by-mrs-khallas-thumbnail hindi-poems-on-confusion-by-mrs-khallas-thumbnail

Poetry , Mrs Khallasबेइमानी यादेंरिश्तेदर्दमाँ,  सलाह,  ईश्वर,  जिन्दगी,  उलझन 

 

 

 

Share

यादें | Yaden – Memories

Share

यादें

Hindi poetry on memories by MrsKhallas-remembering those left behind

I have not left you behind!

For some people all is left are memories. It is certainly a source of strength and hope. See what Mrs Khallas havs to say about memories.

ज़िन्दगी में सासों की तरह
बसी हुई यादें
दिल में धड़कन की तरह
धड़कती हुई यादें
लगती कुछ उजली उजली
फिर सुरमई हुई यादें
हवा की सरसराहट में
सरगोशी करती हुई यादें
आखों में भरकर फिर
बरसती हुई यादें
खाली होती ज़िन्दगी में
मेला लगाती हुई यादें
कुछ कागजों में ख़त
बनी हुई यादें
कहीं से आती हैं कुछ महकी सी
बहकी हुई यादें
बीते हुए पलों में फिर जीने को
तरसती हुई यादें

**********

आओ बना लें कुछ अच्छी यादें
थोड़ी मीठी कुछ खट्टी यादें
वक्त गुजर जाने पर फिर
चख लेगें ये सारी यादें

***********

Hindi poetry on memories by MrsKhallas-Reflection of moon bringing back memories

May be you know, where are they?

दिल के आइने में तेरे अक्स उभर आये
बंद निगाहों में भी अश्क उभर आये

भरी महफिल में भी तन्हा रहे हम
तेरे हिज़्र के जख्म उभर आये

तेरी यादों से गिरां शाम को
पिये अश्क तो कदम लड़खड़ाये

**********

यूं ही चुपचाप आकर घेर लेती है तुम्हारी याद
दिल में एक अनजान तड़प उठती है हर रात

कभी चांदनी रात में मैं और मेरी तन्हाई
गुमसुम से करते हैं तुम्हारी बात

घेर लेती हैं तुम्हारी बाहें
और खामोश हो जाती है तब हर रात

उन हवाओं से भेजते हैं पैगाम दिले मुज्बर का
आती हैं खुशबू तुम्हारी जिन हवाओं के साथ

 

Poetries-by-Mr-Khallas-and-his-family-and-friends-enforcing-creativity-is-fun-thumbnail poems-by-Mrs-Khallas-thumbnail  Hindi-poetry-on-dishonesty-by-mrs-khallas-thumbnail Hindi-poetry-on-memories-by-Mrs-Khallas-thumbnail hindi-poetry-on-relationship-by-mrs-khallas-thumbnail hindi-poem-on-Pain-by-mrs-khallas-Thumbnail hindi-poem-on-ma-or-mother-by-mrs-khallas-Thumbnail Hindi-poems-on-advice-by-mrs-khallas-Thumbnail Hindi-poems-on-god-or-Khuda-by-mrs-khallas-thumbnail hindi-poems-on-life-or-zindgi-by-mrs-khallas-thumbnail hindi-poems-on-confusion-by-mrs-khallas-thumbnail

Poetry , Mrs Khallasबेइमानी यादेंरिश्तेदर्दमाँ,  सलाह,  ईश्वर,  जिन्दगी,  उलझन 

 

 

 

Share

बेइमानी | Baimani – Dishonesty

Share

 बेइमानी

Hindi Poetry by Mrs Khallas on Dishonesty - Gossiping as everyday part of dishonesty

But I want to be in her good books!

Find how deeply ingrained is dishonesty in our society. Mrs Khallas presents the brighter side of this great skill

हम सबके दिल में है
थोड़ी सी बेइमानी

जो यह नहीं मानता वह अपने से ही करता है
थोड़ी सी बेइमानी

रोज मर्रा की भागती दौड़ती थकती जिन्दगी को
राहत दे जाती है
थोड़ी सी बेइमानी

बचपन में जवानी में, नानी की कहानी में
बुढ़ापे की भूल भुलैया में
करते हैं हम सभी
थोड़ी सी बेइमानी

कभी रोते को हँसाने के लिये
कभी रूठे को मनाने के लिये
कभी भूखे को खिलाने के लिये
कभी भोजन को बचाने लिये
कभी ना कभी
करते हैं हम सभी
थोड़ी सी बेइमानी

Hindi Poetry by Mrs Khallas on Dishonesty - common practice of using dishonesty to get justice in courts

I swear – Believe me!

कभी रिश्तों को बचाने के लिये
कभी रिश्तों को बढ़ाने के लिये
कभी ज्यादा जीने के लिये
कभी जल्दी मरने के लिये
करते हैं हम सभी
थोड़ी सी बेइमानी

हर देश में हर काल में
हर हाथ में हर भाल  में
जीवन के बुने हुए हर जाल में
किस्मत के हर कमाल में
लिख ली है हम सभी ने
थोड़ी सी बेइमानी

और आखिर में
ईमान की कसम खानी पड़ती है
जब मन में होती है
थोड़ी सी बेइमानी

 

Poetries-by-Mr-Khallas-and-his-family-and-friends-enforcing-creativity-is-fun-thumbnail poems-by-Mrs-Khallas-thumbnail  Hindi-poetry-on-dishonesty-by-mrs-khallas-thumbnail Hindi-poetry-on-memories-by-Mrs-Khallas-thumbnail hindi-poetry-on-relationship-by-mrs-khallas-thumbnail hindi-poem-on-Pain-by-mrs-khallas-Thumbnail hindi-poem-on-ma-or-mother-by-mrs-khallas-Thumbnail Hindi-poems-on-advice-by-mrs-khallas-Thumbnail Hindi-poems-on-god-or-Khuda-by-mrs-khallas-thumbnail hindi-poems-on-life-or-zindgi-by-mrs-khallas-thumbnail hindi-poems-on-confusion-by-mrs-khallas-thumbnail

Poetry , Mrs Khallasबेइमानी यादेंरिश्तेदर्दमाँ,  सलाह,  ईश्वर,  जिन्दगी,  उलझन 

 

 

 

Share

तेरी अदा | Teri Ada – Your Style

Share

तेरी अदा

Bachia Ke Tau brings the never ending expectations from the loved ones through his poem titled तेरी अदा | Teri Ada – Your Style

Do I belive you or myself?

Why it is that people hold on to one little grudge against numerous favours and we still care more about their opinions than our own beliefs. Do you share the same paradox with Tau ji.

करुं क्या बयां मैं तेरी अदा
तेरी हर अदा ने दगा किया
कबि मौत से तो डरे न तुम
हमें ज़िंदगी से डरा दिया
तेरी शौक और तेरी अज़मदे
मेरी ज़िंदगी से हैं खेलते
कभी रो के हमको बुला लिया
कभी हंस के हमको भुला दिया
वही मंजिले वाही मयकदे
वाही आशमां पर कहां है तू
या तो मुझको नशा ही हुआ गहर
या कि तूने मकां ही बदल दिया
कभी मेरी गली से भी तो गुजर
कभी आ के देख मेरी खबर
कि अभी तलक भी बुझा नहीं
जो चिराग तूने जला दिया

************

नियति

वो हंस के कह गये,
हम हंस के सह गये,
कब के रुके समंदर
एक पल मे बह गये..

समझा उन्हें खुदा तो,
वो खुदा ही हो गये,
हम मदिरों की हद पे
फकिरो से रह गये.

अब ये सिलसिला ख़तम हो
ख़त्म हो गिलों की गिनती
रहे फक्र कि हम भी अपने
जुनूनो मे पॅट गये.
कब के रुके समंदर
एक पल मे बह गये..

 

 

Poetries by Mr Khallas and his family and friends enforcing creativity is fun - thumbnail Poems-by-bachia-ke-tau-urf-Abhay-Johari-Thumbnail In his poem titled इमारत | Imarat – Home Bachia Ke Tau takes up on one of the basic necessities of every creature -Thumbnail In his poem titled ख़ुशी | Khushi – Happiness Bachia Ke Tau defins the deceptive nature of happiness -Thumbnail Bachia Ke Tau brings the never ending expectations from the loved ones through his poem titled तेरी अदा | Teri Ada – Your Style - Thumbnail

PoetryBachia Ke Tauइमारतख़ुशीतेरी अदा

 

 


Share

ख़ुशी | Khushi – Happiness

Share

ख़ुशी

In his poem titled ख़ुशी | Khushi – Happiness Bachia Ke Tau defins the deceptive nature of happiness

Why we can not hold on to happiness?

It is not easy to hold on to time especially if it is good time. It seems to be rare and moving much faster. Tau ji brings this delima very nicely.

बंद मुठ्ठी की दरारों से
रेत सी फिसल जाती
हर ख़ुशी
मिल जाती है विस्तृत रेगिस्तान में
छोड़ कर चंद दाने चांदी के
हथेली में चिपके
जरा सी रोशनी में चमक कर
ये जताने के लिये
कि
मैंने भी पकड़नी चाही थी
एक मुठ्ठी खुशी

*************

शुभ दीपावली

I his poem Bachia Ke Tau fails to understand the dilemma why people celebrates to show off rather than just to express their happiness

Celebration – Who Is it for – us or them?

अब कौन जलाता है दिये
अँधेरे हटाने के लिए,
आज की दीवाली है
चकाचौन्ध बढ़ाने के लिए।

कुछ के लिए नया बर्तन
एक चम्मच भर है,
कुछ खरीद रहे है सोना
दिखावे के लिए।

उसका नया कपड़ा
एक रुमाल ही भला,
सब तो खरीद रहे हैं
जमाने के लिए।

मुझे कतई रंज नहीं
अमीरों की अमीरी से,
यही तो चाहिये
देश का औसत ऊठाने के लिए ।।

 

Poetries by Mr Khallas and his family and friends enforcing creativity is fun - thumbnail Poems-by-bachia-ke-tau-urf-Abhay-Johari-Thumbnail In his poem titled इमारत | Imarat – Home Bachia Ke Tau takes up on one of the basic necessities of every creature -Thumbnail In his poem titled ख़ुशी | Khushi – Happiness Bachia Ke Tau defins the deceptive nature of happiness -Thumbnail Bachia Ke Tau brings the never ending expectations from the loved ones through his poem titled तेरी अदा | Teri Ada – Your Style - Thumbnail

PoetryBachia Ke Tauइमारतख़ुशीतेरी अदा

 

 


 

Share

इमारत | Imarat – Home

Share

इमारत

In his poem titled इमारत | Imarat – Home Bachia Ke Tau takes up on one of the basic necessities of every creature

Building a safe & durable nest is never easy even for the strongest one!

Tau ji has expanded the term Building or Castle not only for Body or Soul but also to society, planets and universe.

कभी चुनी थी मैंने
एक ईमारत ईंट ईंट
जानकर भी, कि
गिरना इसका अवश्यमभावी था क्योंकि
नींव मैंने नहीं रखी थी
सिर्फ एक आभास था कि
नींव मौजूद है कहीं
और अब लगता है कि कदाचित
नीवं और ईमारत मेल नहीं खाते एक दूसरे से
गिरना तो इसे है ही फिर
मैं क्यों हटाउं –
अपने ही द्वारा चुनी ईटें
छोड़ दी पूरी ईमारत मैंने उसके ही भाग्य पर
सोचकर कि
गिरेगी एक बरगी ये बा आवाज-ए बुलन्द
जान जायेगी सारी दुनिया और मैं भी
कि ढह गयी ईमारत
पर मरी ये ईमारत गिर भी रही है तो
ईंट ईंट आहिस्ता आहिस्ता बेआवाज
मुझ से ही नजर बचाकर जानें क्यों
चलो गिरी तो सही
भले ही सिसक सिसक कर
अब रह गयी है शेष वो धरोहर (नीवं)
जो मैंने नहीं रखी थी
इसे जरूर मैं नोंच फेकूंगा
फिर भले ही रह जाये
जमीन पर घाव आड़े तिरछे
जैसे सब भरे हैं ये भी भर जायेंगे
दिखने को अवशेष तो न रह जायेंगे
फिर एक और नई ईमारत
भले ही न बने
पर वह तो न रह जायेगी
जो कभी
मैंने चुनी थी
एक अर्थहीन धरोहर पर – – – –

*************

सूर्य

 I his poem on Sun, Bachia Ke Tau reminds us not to forget the efforts put in by everyone else behind our success

How can Sun be proud of itself?

बड़ा गर्व है तुम्हें अपने सूर्य होने
पर स्मरण रहे
सूर्य बनना तुम्हारा कर्म नहीं
तुम्हारी नियति है
नहीं संभलता था तुमसे तुम्हारा द्रव्य
और घोर अभिमान
न था तुम्हारा परिचय न पता
जब अति से अधिक हो गया तुम्हारा संग्रह
और धू धू कर जलने लगा तुम्हारा द्रव्य
सोने सा पिघल गया तुम्हारा अहम्
तब हुआ था तुम्हारा जन्म
ये प्रकाश और तप तुम्हारी देन नहीं हैं
तुम्हारा प्राशचित्य हैं कहीं
भूल से भी मत ये सोच लेना
तुम्हारे चारों तरफ परिक्रमा करते
ये पिंड तुम्हारे कर्मों पर टिके हैं
या इनका अस्तित्व तुमसे है
वस्तुतः तुम्हारा परिचय इनसे है
ये थोड़ा जीते हैं थोड़ा जियेंगे
भस्म हो जायेंगे पर
तुम्हें तुम्हारा नाम दे जायेंगे
महानता चिरन्तरता में नहीं छड़िक्ता में है
स्थिरता में नहीं चंचलता में है
व्यवस्था में नहीं विकर्णता में है
नमन में नहीं नास्तिकता में है
अस्तित्व में नहीं अमरत्व में है

 

Poetries by Mr Khallas and his family and friends enforcing creativity is fun - thumbnail Poems-by-bachia-ke-tau-urf-Abhay-Johari-Thumbnail In his poem titled इमारत | Imarat – Home Bachia Ke Tau takes up on one of the basic necessities of every creature -Thumbnail In his poem titled ख़ुशी | Khushi – Happiness Bachia Ke Tau defins the deceptive nature of happiness -Thumbnail Bachia Ke Tau brings the never ending expectations from the loved ones through his poem titled तेरी अदा | Teri Ada – Your Style - Thumbnail

PoetryBachia Ke Tauइमारतख़ुशीतेरी अदा

 

 

 

Share